बुढापा
1:56 PM | Author: Sherry Italia
बुढापा जब आता है, बस आता ही जाता है
मौत से इस्का एक गेहरा सा नाता है |
बुढापे की लाठी, नहीं रही अब पास
न मरने की हिम्मत, न जीने की आस |

दरवाज़े की और देखे सूनी, तड़पती आँखें
झरोकों की आढ़ में मन रातभर झांके |
"जो मेरी गोद में मज़े से खेला, झूला
वोही प्यारा बेटा मुझे कैसे भूला?"

वीराने सा खाली, गुमसुम से नयन
टूट गया जैसे सपनों का दरपन |
मिटने लगी आरज़ू की काया
जीवन तरसती प्यार का साया |

ये कैसा दूसरा बचपन, मेरे नाथ
जहां अपनों ने छोड़ दिया गैरों के हाथ |
चंद साँसों के अलावा नहीं कोई अपना
काश यह भयंकर सच होता एक सपना |

बुढापा जब आता है, बस आता ही जाता है
मौत से इस्का एक गेहरा सा नाता है |
ये है एक अरसा, या भगवन का कहर
जिंदगी का सांझ अब लगता है भयंकर |
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