मौसम
5:58 PM | Author: Sherry Italia
महीने जैसे करवट लेते हैं, 
मौसम के रुत बदलते रहते हैं |
हर मौसम कुछ अलग लाता है
नए लम्हों की सौगात दिए लौट जाता है |

जब हुआ वसंत का आगमन,  
झूमने लगा बांवरा चंचल पवन,
गूंजी हवा मैं वन्प्रिया की कलकल,
चारों तरफ देखो ख़ुशी की हलचल  |

ग्रीष्म में सूर्य ने जमाया डेरा,
अंबर को दिया एक लंबा पहरा,
सुलगा दिया धरती का कण कण,
गर्मी से बेहाल हुए गण गण |

जब वसुधा ने गाया राग मल्हार,
बरस पड़ी फिर नीरा की धार,
वर्षा ने ये कैसी रास रचाई,
मेघा ने बूंदों की संपत्ति बरसाई |

पतझड़ भी न जाने कब आई, 
मुर्झाएपन का तोहफा लाई,
पत्तों ने छोड़ दी पेड़ों की डाल,
गिरगिट सी बदली रंगों की चाल |

जाड़ों की नर्म धूप जब छाई,
पुर्वाईयों ने जैसे ली अंगड़ाई,
पहाड़ों ने ओढ़ ली चादर बर्फीली,
पाले में लिपटी भूमि शर्मीली |

महीने जैसे करवट लेते हैं, 
मौसम के रुत बदलते रहते हैं |
हर मौसम कुछ अलग लाता है
नए लम्हों की सौगात दिए लौट जाता है |

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2 scribbling(s):

On December 1, 2010 at 7:05 PM , AJAY said...

sherry dear teri poem padhkar muze mera bachpan yaad aaya. keep writing and posting.

 
On December 1, 2010 at 11:45 PM , Aprajita said...

very nice..
:)
waiting to read more such hindi poems on ur blog.. :)